श्री बालाजी चालीसा - चालीसा संग्रह

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Saturday, October 23, 2021

श्री बालाजी चालीसा

॥श्री बालाजी चालीसा॥

॥ दोहा ॥

श्री गुरू चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान ॥

बालाजी चालीसा लिखें दास स्नेही कल्याण ॥

विश्व विदित वर दानी संकट हरण हनुमान ॥

मेंहदीपुर प्रकट भये बालाजी भगवान ॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान बालाजी देव । प्रकट भए यहाँ तीनों देवा ॥

प्रेतराज भैरव बलवाना। कोतवाल कप्तान हनुमाना ॥

मेहदीपुर अवतार लिया है। भक्तो का उध्दार किया है ॥

बालरूप प्रकटे है यहां पर। संकट वाले आते है जहाँ पर ॥

डाकनि, शाकनि अरु जिन्दनी। मशान चुडैल भूत भूतनी ॥

जाके भय से सब भाग जाते। स्याने भोपे यहाँ घबराते ॥

चौकी बंधन सब कट जाते। दूत मिले आनंद मनाते ॥

सच्चा है दरबार तिहारा। शरण पडे सुख पावे भारा ॥

रूप तेज बल अतुलित धामा। सन्मुख जिनके सिय रामा ॥

कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा। सवकी होवत पूर्ण आशा ॥

महंत गणेशपुरी गुणीले। भए सुसेवक राम रंगीले ॥

अद्भुत कला दिखाई कैसी। कलयुग ज्योति जलाई जैसी ॥

ऊँची ध्वज पताका नभ में। स्वर्ण कलश है उन्नत जग मे ॥

धर्म सत्य का दंका बाजे। सियाराम जय शंकर राजे ॥

आना फिराया मुगदर घोटा। भूत जिंद पर पडते सोटा ॥

राम लक्ष्मण सिय ह्रदय कल्याणा। बाल रूप प्रकटे हनुमाना ॥

जय हनुमंत हठीले देवा। पुरी परिवार करत है सेवा ॥

चूरमा, मिश्री, मेवा। पुरी परिवार करत है सेवा ॥

लड्डू, चूरमा, मिश्री, मेवा। अर्जी दरखास्त लगाऊँ देवा ॥

दया करे सब विधि बालाजी। लंकट हरण प्रकटे बालाजी ॥

जय बाबा की जन-जन उचारे। कोटिक जन आए हेरे द्वारे ॥

बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा। तिमिर मय जग कीन्ही तीन्हा॥

देवन विनती की अति भारी। छाँड दियो रवि कष्ट निहारी ॥

लाँघि उदधि सिया सुधि लाए। लक्ष हित संजीवन लाए ॥

रामानुज प्राण दिवाकर। शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर ॥

केसरी नंदन दुख भव भंजन। रामानंद सदा सुख सुख संदन ॥

सिया राम के प्राण प्यारे। जय बाबा की भक्तउचारे ॥

संकट दुख भंजन भगवाना। हया दरहु हे कृप्या निधाना ॥

सुमर बाल रूप कल्याणा। करे मनोरथ पूर्ण कामा ॥

अष्ट सिध्दि नव निधि दातारी। भक्त जन आवे बहु भारी ॥

मेवा अरु मिष्ठान प्रवीना। भेट चढावें धनि अरु दीना ॥

नृत्य करे नित न्यारे-न्यारे। रिध्दि-सिध्दियाँ जाके द्वारे ॥

अर्जी का आदेश मिलते ही। भैरव भूत पकडते तब ही ॥

कोतवाल कप्तान कृपाणी। प्रेतराज संकट कल्याणी ॥

चौकी बंधन कटते भाई। जो जन करते है सेवकाई ॥

रामदास बाल भगवंता। मेहदीपुर प्रकटे हनुमंता ॥

जो जन बालाजी मे आते है। जन्म-जन्म के पाप नशाते ॥

जल पावन लेकर घर आते। निर्मल हो आनंद मनाते ॥

क्रूर कठिन संकट भगजावे। सत्य धर्म पथ राह दिखावे ॥

जो सत पाठ करे चालीसा। तापर प्रसन्न होय बागीसा ॥

कल्याण स्नेही, स्नेह से गावे। सुख समृध्दि रिध्दि सिध्दि पावे ॥

॥दोहा॥

मंद बुध्दि मम जानके क्षमा करो गुणखान ॥

संकट मोचन क्षमहु मम दास स्नेही कल्याण ॥

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