श्री चामुण्डा देवी चालीसा - चालीसा संग्रह

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Sunday, October 24, 2021

श्री चामुण्डा देवी चालीसा

॥श्री चामुण्डा देवी चालीसा ॥

॥ दोहा ॥

नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड ।

दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ॥

मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत ।

मेरी भी बढ़ा हरो हो जो कर्म पुनीत ॥

॥ चौपाई ॥

नमस्कार चामुंडा माता । तीनो लोक मई मई विख्याता ॥

हिमाल्या मई पवितरा धाम है । महाशक्ति तुमको प्रडम है ॥

मार्कंडिए ऋषि ने धीयया । कैसे प्रगती भेद बताया ॥

सूभ निसुभ दो डेतिए बलसाली । तीनो लोक जो कर दिए खाली ॥

वायु अग्नि याँ कुबेर संग । सूर्या चंद्रा वरुण हुए तंग ॥

अपमानित चर्नो मई आए । गिरिराज हिमआलये को लाए ॥

भद्रा-रॉंद्र्रा निट्टया धीयया । चेतन शक्ति करके बुलाया ॥

क्रोधित होकर काली आई । जिसने अपनी लीला दिखाई ॥

चंदड़ मूंदड़ ओर सुंभ पतए । कामुक वेरी लड़ने आए ॥

पहले सुग्गृीव दूत को मारा । भगा चंदड़ भी मारा मारा ॥

अरबो सैनिक लेकर आया । द्रहूँ लॉकंगन क्रोध दिखाया ॥

जैसे ही दुस्त ललकारा । हा उ सबद्ड गुंजा के मारा ॥

सेना ने मचाई भगदड़ । फादा सिंग ने आया जो बाद ॥

हत्टिया करने चंदड़-मूंदड़ आए । मदिरा पीकेर के घुर्रई ॥

चतुरंगी सेना संग लाए । उचे उचे सीविएर गिराई ॥

तुमने क्रोधित रूप निकाला । प्रगती डाल गले मूंद माला ॥

चर्म की सॅडी चीते वाली । हड्डी ढ़ाचा था बलसाली ॥

विकराल मुखी आँखे दिखलाई । जिसे देख सृिस्टी घबराई ॥

चंदड़ मूंदड़ ने चकरा चलाया । ले तलवार हू साबद गूंजाया ॥

पपियो का कर दिया निस्तरा । चंदड़ मूंदड़ दोनो को मारा ॥

हाथ मई मस्तक ले मुस्काई । पापी सेना फिर घबराई ॥

सरस्वती मा तुम्हे पुकारा । पड़ा चामुंडा नाम तिहरा ॥

चंदड़ मूंदड़ की मिरतट्यु सुनकर । कालक मौर्या आए रात पर ॥

अरब खराब युध के पाठ पर । झोक दिए सब चामुंडा पर ॥

उगर्र चंडिका प्रगती आकर । गीडदीयो की वाडी भरकर ॥

काली ख़टवांग घुसो से मारा । ब्रह्माड्ड ने फेकि जल धारा ॥

माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया । मा वेश्दवी कक्करा घुमाया ॥

कार्तिके के शक्ति आई । नार्सिंघई दित्तियो पे छाई ॥

चुन चुन सिंग सभी को खाया । हर दानव घायल घबराया ॥

रक्टतबीज माया फेलाई । शक्ति उसने नई दिखाई ॥

रक्त्त गिरा जब धरती उपर । नया डेतिए प्रगता था वही पर ॥

चाँदी मा अब शूल घुमाया । मारा उसको लहू चूसाया ॥

सूभ निसुभ अब डोडे आए । सततर सेना भरकर लाए ॥

वाज्ररपात संग सूल चलाया । सभी देवता कुछ घबराई ॥

ललकारा फिर घुसा मारा । ले त्रिसूल किया निस्तरा ॥

सूभ निसुभ धरती पर सोए । डेतिए सभी देखकर रोए ॥

कहमुंडा मा ध्ृम बचाया । अपना सूभ मंदिर बनवाया ॥

सभी देवता आके मानते । हनुमत भेराव चवर दुलते ॥

आसवीं चेट नवराततरे अओ । धवजा नारियल भेट चाड़ौ ॥

वांडर नदी सनन करऔ । चामुंडा मा तुमको पियौ ॥

॥ दोहा ॥

सरणागत को शक्ति दो हे जाग की आधार ।

‘ओम’ ये नेया दोलती कर दो भाव से पार ॥

॥ इति चामुण्डा देवी चालीसा ॥

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